कितनी ही रस्मो दुहाई दी तुझे मैंने
पर बेरुखी का रुख तूने अपनाया हुआ हैं
बंद करके देख ली आँखें तेरे शौकत की नज़्म पे
तू फना हो गया या इठलाया हुआ हैं
तेरे जलसे का नशी मैं तेरा रहमो करम
तू ही तू हैं फिर पर्दा क्यूं लगाया हुआ हैं
तुझे पाने की जुस्तजू में मैं मिटता रहूं
तेरे कदमों की आहट को लगाकर सीने से
मैं बैठा रहा तू आया नही
मैने सजदे किये तू समाया नहीं
ये तेरी हैं शरारत या हैं और कोई दास्तां
तू बताता नहीं तू समझाता नहीं
तू दर्द ए मरहम भी लगाता नहीं
तू आया नहीं तू आया नहीं
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All Round Poetry 2025 Contestनज़्म
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This is so gut-wrenching. the plea of wanting them to return to you. nice
Actually it’s about God. Thank you so much 🙂
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