भोली है सूरत, नाजुक-सी तू गुड़िया
नैनो के कटोरो मे, प्यार का दरिया
काजल की डोर, बांधे मन हर-और
भीनी मुस्कनिया, मन- मोहिनी छविया
गुपचुप बतलाती, लगती शर्माती कोयलिया
तेरे तन की खुशबू,
जैसे महकी कही बगिया
माथे की बिंदिया, खनकती पायलिया
फूल के साथ, जैसे इतराती कलियाँ
ऐसा सुंदर सुरूप यौवन तुम्हारा
मेरे नैनो का तारा, मन व्याकुल हमारा
तू आती ही रहना, अंग लगाती ही रहना
मेघ से लिपटी जैसे इठलाती बिजुरिया







