शहर

वो छानते रहे रास्ते तुझसे मिलने के लिये मैं तेरे शहर में भटकने को मशगूल हूँ !उन्हें मंजूर हैं तू किसी पैमाने पर कसा शायद मैं तुझे कतरा कतरा जीने में चूर हूँ ! 0

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खारा

देख मीठे पानी के फव्वारे तू गिला न कर कि हर कोई कश्तियों का सहारा नहीं होता इल्ज़ाम अगर हैं कि तू गाढ़ खारा हैं तू समन्दर हैं, बे-मतलब किसी को प्यारा नहीं होता 0

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मुमताज़

मांगा तो था ताजमहल मुमताज़ के साथ ही रकीब ने पर सुना है इस जहां में कुछ खो कर ही कुछ पाया जाता हैं । 0

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इल्ज़ेमात

लगा रहे हो इल्ज़ेमात जो कटघरे में हम पर ना जीना तुम्हें यहां एक अरसा, ना जीना हमें यहां एक अरसा 0

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छलावा

कोई पूछे उस छलावे से क्यूं जगमगा रहा हैं तेरे तले बसा वो घर मैंने सुना हैं उजियारे में तो सारा जहां रोशन होता हैं । 0

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