रुकते नही कदम आँधी तूफान से,
कपती है ये ज़मीन टापो की तान से,,
हम सीने मे लिये,
है आशा के दिये,,
अब बुझ ना पाये लौ,
चाहे जाये प्राण से,,
गूंजा दो धरा जैसे सिंंह- गर्जना,
करने दो हमी से मृत्यु को वंचना,,
बनके सत्य की मिसाल,
कर देंगे भूमि लाल,,
चाहे गिरते हो तो गिरने दो
शरीर शहीद के नाम पे…….