तू नही जानता कि किस होश मे हूँ मैं,
तू नही जानता कि मदहोश-बेहोश हूँ मैं
पी कर शराब्-ए -तरन्नुम,, आज खुदि से खामोश हूँ मैं
छोड आया हूँ बादलों की पंक्तियों सी, झूठी तस्वीर ख्वाबो और मंज़िल की,,
सुलगता रहूँ तेरी इस आबो-हवा मे (रोशनी), सोचकर ये पुरजौश हूँ मैं ,,
एक जलवा तू भी इंतज़ाम कर, जलने की तारीख-जगह-वक़्त फरमान कर,,
सज़ाता जा रहा सेज ये हस्ती मिटाने के लिये, मिलने के लिये तुझसे मुस्तेज हूँ मैं….







यह एक बहुत गहरी कविता है, आप इसे केवल हिंदी में क्यों लिखते हैं?
Lol.. How can you write in Hindi? Google translate I assume :)….. Actually I don’t choose language… Words come in mind by themselves…. Sometimes they are in english…. Sometimes they are in hindi
It I a really good poem. (yes, google translate helped;)