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तरन्नुम

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तू नही जानता कि किस होश मे हूँ मैं,  
तू नही जानता कि मदहोश-बेहोश  हूँ मैं
पी कर शराब्-ए -तरन्नुम,,  आज खुदि से खामोश हूँ मैं

छोड आया हूँ बादलों की पंक्तियों सी, झूठी तस्वीर ख्वाबो और मंज़िल की,,  
सुलगता रहूँ तेरी इस आबो-हवा मे (रोशनी), सोचकर ये पुरजौश हूँ मैं ,,  

एक जलवा तू भी इंतज़ाम कर, जलने की तारीख-जगह-वक़्त फरमान कर,,  
सज़ाता जा रहा सेज ये हस्ती मिटाने के लिये, मिलने के लिये तुझसे मुस्तेज हूँ मैं….

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